रक्षाबंधन 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Tithi & Muhurat) साल 2026 में रक्षाबंधन का पावन पर्व 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। सा...
रक्षाबंधन 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Tithi & Muhurat)
साल 2026 में रक्षाबंधन का पावन पर्व 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।
सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार उदयातिथि और भद्रा-मुक्त काल में ही राखी बांधना श्रेष्ठ माना जाता है, इसलिए मुख्य पर्व 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा।
रक्षाबंधन 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Tithi & Muhurat)
भद्रा काल की स्थिति (Bhadra Kaal Timing)
शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना वर्जित होता है।
27 अगस्त: भद्रा सुबह 09:08 बजे से रात 09:32 बजे तक रहेगी। इसलिए 27 अगस्त के दिन भद्रा के कारण राखी बांधना उचित नहीं माना जाएगा।
28 अगस्त: 28 अगस्त की सुबह भद्रा काल का साया पूरी तरह खत्म रहेगा, जिससे सुबह के शुभ मुहूर्त में बिना किसी बाधा के राखी बांधी जा सकती है।
पूजा की सरल विधि (Puja Vidhi)
थाली सजाएं: पूजा की थाली में कुमकुम/रोली, अक्षत (चावल), दीपक, मिठाई, आरती और रक्षासूत्र (राखी) रखें।
देव पूजन: सबसे पहले भगवान गणेश और भगवान शिव/श्री कृष्ण को राखी अर्पित कर आशीर्वाद लें।
तिलक व आरती: भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। बहन भाई के माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएं और आरती उतारें।
राखी बांधना: भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधें और मिठाई खिलाएं।
संकल्प व उपहार: भाई अपनी बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें, उसकी रक्षा का संकल्प लें और स्वेच्छा से उपहार दें।
रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व
संरक्षण का वचन: यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, सुरक्षा और स्नेह का प्रतीक है।
पौराणिक संदर्भ: माना जाता है कि द्रौपदी ने भगवान श्री कृष्ण की उंगली पर अपनी साड़ी का पल्लू बांधा था, जिसके बदले श्री कृष्ण ने चीरहरण के समय द्रौपदी की रक्षा की थी। इसके अलावा, देवराज इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने भी असुरों पर विजय पाने के लिए इंद्र की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था।
रक्षा पंचमी मे गोगा पूजन का का महत्व
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गुजरात प्रान्त की धार्मिक मान्यता के अनुसार गोगा जी की पूजा करने से संतानहीन को संतान की प्राप्ति होती है, बच्चों वाली महिलाओं के बच्चे दीर्धायु होते है, गोगाजी उनके बालकों के जीवन की रक्षा करते है। इसीलिये मातायें अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और लम्बी आयु की कामना के साथ गोगा जी की पूजा-अर्चना करती हैं।कैसे करें पूजा
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शास्त्र पद्धति गदाधर के अनुसार इस दिन घर की दक्षिण पश्चिमी दिशा में कोयले अथवा काले चूर्णों से काले रंगों से सर्पों का चित्र बनाकर उनकी पूजा करने का विधान है. सर्प पूजन करने से सर्प प्रसन्न होते हैं और वंशजों को कोई डर नहीं सताता।भगवान कृष्ण ने भागवत में कहा है कि ‘मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव’ अर्थात ‘सूत्र’ अविच्छिन्नता का प्रतीक है क्योंकि सूत्र (धागा) बिखरे हुए मोतियों को अपने में पिरोकर एक माला के रूप में एकाकार बनाता है. माला के सूत्र की तरह रक्षासूत्र भी लोगों को जोड़ता है.
पूजन की विधि〰〰〰〰〰
इस दिन प्रातः काल दैनिक कृत से निवृत होकर विधिवत हरिद्रा गणेश, सर्पनाथ भैरव और शिव के ताड़केश्वर स्वरुप का विधिवत पूजन करें.👉 धूप दीप पुष्प गंध और नववैध अर्पित करें और गणेश जी पर दूर्वा, सिंदूर लड्डू चढ़ाएं।
👉 भैरव जी पर उड़द गुड़ और सिंदूर अर्पित करें और ताड़ के पत्ते पर 'त्रीं ताडकेश्वर नमः' लिखकर घर के उत्तर दिशा के द्वार पर टांग दें।
👉 ताड़ के पत्ते के साथ-साथ एक पीले रंग की पोटली में दूर्वा, अक्षत, पीली सरसों, कुशा और हल्दी बांधकर टांग दें।
👉 पूजन में गणेश भैरव और शिव के चित्रों पर रक्षासूत्र स्पर्श करवाकर घर के सभी सदस्यों को बांधें.
इस मंत्र का करें जाप
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'मंत्र: कुरुल्ले हुं फट्स्वाहा।।'
जाप पूरा होने के बाद रात्रि के समय नाग, बैताल ब्रह्मराक्षस और दश दिगपाल आदि का खीर से पूजन कर रात्रि के समय उनके लिए घर की दक्षिण पश्चिम दिशा में खीर का भोग रखें. बाएं हाथ में ली हुई काले नमक की डली और उड़द पीले कपड़े में बांधकर घर की दक्षिण पश्चिम दिशा में छुपाकर रख दें. इस पूजन और उपाय से सारे परिवार के प्राणों की रक्षा होती है. इस पूजन से सर्प और देव, गन्धर्व प्रसन्न होते हैं और वंशजों की रक्षा होती है


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