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कब है ग्रहण -क्या न करें ग्रहणकाल -में-kya-hota-hai-kab-hai-grahan-me-bhojan-kyu-na-kre

  कब है ग्रहण -क्या न करें ग्रहणकाल -में-kab-hai-grahan-me-bhojan-kyu-na-kre- मित्रों हम आपको इस लेख के माध्यम से बताने जा रहे है की कब है ग...

 
Grahan-picकब है ग्रहण -क्या न करें ग्रहणकाल -में-kab-hai-grahan-me-bhojan-kyu-na-kre-

मित्रों हम आपको इस लेख के माध्यम से बताने जा रहे है की कब है ग्रहण -क्या न करें ग्रहणकाल में पूरी जानकारी प्राप्त करें

ग्रहण क्या होता है-

ग्रहण एक खगोलीय घटना है जो तब होती है जब कोई खगोलीय पिण्ड या अंतरिक्ष यान अस्थायी रूप सेग्रहण क्या होता है किसी अन्य पिंड की छाया में आता है या उसके और दर्शक के बीच कोई अन्य पिंड आ जाता है । तीन आकाशीय पिंडों का यह एक सीध में आना युति वियुति रूप में जाना जाता है।

2022 में ग्रहण कब लगने वाला है-

24 अक्टूबर को शाम 5.04 बजे से अमावस्या तिथि आरंभ होकर 25 अक्टूबर मंगलवार की शाम 4.35 बजे तक रहेगी । वहीं पच्चीस अक्टूबर मंगलवार को सूर्यग्रहण का नजारा दिखाई देगा। वहीं कार्तिक के महीने के आखिरी दिन पूर्णिमा गंगा स्नान पर 8 नवंबर 2022 मंगलवार को शाम 2:39 से 6:19 तक चंद्रग्रहण होगा

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 ग्रहणकाल में भोजन करना वर्जित क्यों-

हमारे ऋषि-मुनियों ने सूर्य और चंद्रग्रहण लगने के समय भोजन करने के लिए मना किया है, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के दौरान खाद्यवस्तुओं, जल आदि में सूक्ष्मजीव एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते हैं। इसलिए इनमें कुश डाल दिया जाता है, ताकि कीटाणु कुछ में एकत्रित से जाएं और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके। शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के बाद स्नान करके पवित्र होने के पश्चा भोजन करना चाहिए। ग्रहण के समय भोजन करने से सूक्ष्म कीटाणुओं के पेट में जाने से रोग होने की आशंका रहती है। इसी वजह से यह विधान बनाया गया है।

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 अपने शोधों से वैज्ञानिक टारिस्टन ने यह पाया कि ग्रहण के समय मनुष्य की पाचनशक्ति कमजोर हो जाती है, जिसके कारण इस समय किया गया भोजन अपच, अजीर्ण आदि शिकायतें पैदा कर सकता है। भारतीय धर्म-विज्ञानवेत्ताओं का मानना है कि सूर्य और चंद्रग्रहण लगने के 10 घंटे पूर्व से ही उसका प्रभाव शुरू हो जाता है। अंतरिक्षीय प्रदूषण के इस समय को सूतककाल कहा गया है। इसलिए सूतक काल और ग्रहण के समय में भोजन तथा पेय पदार्थों का सेवन मना किया गया है। चूंकि ग्रहण से हमारी जीवनीशक्ति का हास होता है और तुलसीदत (पत्र) में विद्युतशक्ति व प्राणशक्ति सबसे अधिक होती है, इसलिए सौरमंडलीय ग्रहणकाल में ग्रहण-प्रदूषण को समाप्त करने के लिए भोजन तथा पेयसामग्री में तुलसी के कुछ पत्ते डाल दिए जाते हैं, जिसके प्रभाव से न केवल भोज्यपदार्थ बल्कि अन्न, आटा आदि भी प्रदूषण से मुक्त बने रहते हैं।

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