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शिव अभिषेक आवाहन मंत्र

Shri Purneshwar Shiv Sewa Foundation: - विनायक गुरुं भानुं ब्रह्म विष्णु महेश्वरान्।  सरस्वतीँ प्रणम्यादौ सर्वकामार्थ सिद्धएं ॥ श्री गणेशं न...

Shri Purneshwar Shiv Sewa Foundation: -

विनायक गुरुं भानुं ब्रह्म विष्णु महेश्वरान्।

 सरस्वतीँ प्रणम्यादौ सर्वकामार्थ सिद्धएं ॥

श्री गणेशं नमस्कृत्य भीमां च कुलदेवताम्।

 पितरं मातरं चैव विश्वेश्वर मजं प्रभुम्।।

भवानी शंकरौ वन्दे श्रद्धा विश्वास रूपिणौ.

याभ्यां बिना न पश्यति सिद्धा स्वान्तस्थमीश्वरम्।।

प्रथम नमामि महिषासुरचंड-मुंड शुंभासुर दैत्य विनाश दक्षाम।

ब्रह्मएन्द्र मुनि मोहन शील लीलाम , चंडी समस्त सुर मूर्ति अनेकरूपम्।।

नित्यं भजामि भजतामभिलाषदात्रीं, धात्रिम समस्त जगतां दुरिता पहस्त्रिम्। संसार बंधन विमोचन हेतु भूतां, मायां पराम समधिगम्य परस्य विष्णों ।।

रामाय राम भद्राय राम चंद्राय वेधसे,

 रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः।।


मनोभिरामं नमनाभिरामं बचोमि रामं श्रवणाभि रामम्,।

सदाभिरामं सतताभिरामम, वन्दे सदा दासरथिम् च रामम् ॥

Shri Purneshwar Shiv Sewa Foundation: 

वक्र तुण्ड महाकाय कोटि सूर्य सम प्रभ ।

 अविघ्नम कुरुमे देव सर्व कार्येसु सर्वदा ॥ 

सर्व मंगल मागल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्रयम्बके देवी (गौरी) नारायणी नमोस्तुते॥

सशंख चक्रम स किरीट कुण्डलम , 

सपीतवस्त्रम सरसी रुहेक्षणम्,। 

सहार वक्षः स्थल कौस्तुभश्रियम् , 

नमामि विष्णु सिरसा चतुर्भुजं।।

ध्याये नित्यं महेश रजतगिरिनिभम् चारु चंद्रा बसंतम्,रत्ना कल्पो ज्वलांगम परशु मृगवरा भीति हस्तं प्रसन्नम्।

 पद्मासीनं समंतात् स्तुतमर्गेण व्याघ्रीकृति वसानम्।

विश्वाद्यम् बिश्वबीजम् निखिल भय हरं पंचवक्त्रम् त्रिनेत्रम्।।

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।

 नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणता स्मताम्।।

कल्याण्यै प्रणताम वृद्धयै सिद्धयै कुर्मो नमो नमः।

नैऋत्यै भुभूताम लक्ष्म्यै, शर्वाण्यै ते नमो नमो।।

 Shri Purneshwar Shiv Sewa Foundation 

ॐ विश्वानिदेव सवितुर्दुरितानि परासुव यद् भद्रम तन्न आसुव।।

कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रह समाश्रितः।

 मूले तस्य स्थितो बह्म मध्ये मातृगणास्मृतः।

 कुक्षौः तु सागरः सर्वे सप्त दीपा वसुन्धरा।

 ऋग्वेदोथ यजुर्वेदः सामवेदो अथर्वण :।।

अंगैस्च्च सहिताः सर्वे कलशं तु समाश्रितः,।

 अत्र गायत्रि सवित्री शांति पुष्टिकरी तथा। 

सर्वे समुद्रः सरितास्तीर्थानि जलदा नदाः, 

आयान्तु देव पुजार्थ दुरितक्षय कारका॥

 गंगे गंगे च यमुने चैव 


देवदानव संवादे मध्यमाने महोदधौ। 

उत्पन्नोऽसि तदा कुम्भ विद्युतो विष्णुना स्वयं।। 

त्वत्तोये सर्वतीर्थानि देवः,सर्वे त्वयि स्थितः।

त्वयि तिष्ठन्ति भूतानि, त्वयि प्राण प्रतिष्ठितः।।


शिवः स्वयं त्वमेवासी विष्णुस्त्वम् य प्रजापति।

 आदित्या वसवो रुद्रा विश्वे देवाः स पैतृक :। 

त्वयि तिष्ठति सर्वेऽपि, यतः कामफलप्रदाः।

 त्वम् प्रसादा मिमम यज्ञम् 

कर्त मीहे जलोद भवः।। 

सानिध्यम कुरु में देव प्रसन्नो भव सर्वदा।।

 Shri Purneshwar Shiv Sewa Foundation: 

गौरीपदमा शची मेधा सावित्री विजया जया।

 देवसेना स्वधा-स्वाहा मातरो लोकमातरः। 

ह्रष्टि पुष्टि स्थिता तुष्टि रात्मनः कुलदेवता,।

 गणेशेनाधिका ह्वयेता वृद्वहौ पूज्यस्तु षोंडशः।।

आयुरारोग्य मैश्वर्यम् ददद्धम् मातरो मम।

 निर्विघनम सर्व कार्येसु कुरुध्वम समाधिपा ।।

श्रीश्च लक्ष्मी धृतिर्मेधा स्वाहा प्रज्ञा सरस्वती।

, मागल्येषु प्रपुज्यन्ते सप्तैता धृतमातरः।


ब्रह्मा मुरारीस्त्रिपुरान्तकारी भानु शशि भूमि सुतो बुधस्च। 

गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहः शांति करा भवन्तु।।



सूर्यः शौर्य मथेन्दु रुच्चपदवीम् सन्मंगलं मंगला,।

 सदा बुद्धि च बुधो गुरुश्च गुरुतां शुक्रमसुख शं शनि, 

राहुर्बाहु बल करोतु सततम्,केतू कुलउन्नतिम् ।

नित्य प्रीति करा भवन्तु, मम ते सर्वे अनुकुला ग्रहा,।।

योगे-योगे तवस्तरम वाजे वाजे हवामहे, सखाय इंद्रमूरतये महाकाली- महालक्ष्मी महासरस्वती सहित! गजानन चतुषष्ट योगिनी नमोस्तुते-

Shri Purneshwar Shiv Sewa Foundation: 

योगिन्यः शक्तिसम्पत्नाः नाना रूपा सुमंगला। 

महाशक्ति धरादेव्यः मखरक्षां कुरुष्मे।।

क्षेत्रपाल देवा आदित्या वसव स्तिथा,

मरुतस्या अश्विनौ रुद्रा : सुपर्णा: पन्नगा नागा:।

असुरा यातु धानाञ्च पिशाचोर राक्षसः,

डाकिन्यो यक्ष बेताला: योगिन्य पूतना शिवा:।।


जम्भ्रकाः सिद्ध गन्धर्व: सौम्या विद्याधर नगाः,

दिक्पाला लोकपालश्च ये च विनायक:।

जगतां शांतिर्करतारौ ब्रह्माधाश्च महर्षयः,

 माम विघ्नम माम् च मे पापं माम् सन्तु परि पंथीनः ।।


सौम्या भवन्तु तृप्ताश्च भूत प्रेतः सुखावहः,

नमो वै क्षेत्रपालस्वम भूत प्रेत गणे सहः।.

पूजां गृहाण मम देव, सौम्यो भव च सर्वदा॥

पुत्रान् देहि धनं देहि सर्वान् कामश्च देहि में।

 आयु आरोग्यं मे देहि,निर्विघ्नम् कुरु सर्वदा।।


योगिन्यः शक्तिसम्पन्नः नानारूपाः सुमंगलाः,

 महाशक्ति धरादेव्या ममभार रक्षां कुरुश्वमें।।


या देवी सर्वभूतेषु मातरूपेण संस्थिथा । 

नमस्तस्यै -3


देव देव जगन्नाथम् भक्तानुग्रह कारकम्।

 चतुर्भुजम् रमानाथम श्री वास्तु देवम नमाम्यहम् ॥

 Shri Purneshwar Shiv Sewa Foundation: 

इन सब देवताओं का आवाहन करके सामान्य रूप से पूजन 

करें एवं यह कहता हुआ जल छोड़ें

अनेनार्चेन सर्वे अवहित देवा प्रियन्ताम् न मम

इसके उपरान्त शिवार्चन आरंभ करें :-

न्यास मूलमिदं प्रोक्तं न्यास पूर्वं तु कार्येत्।। 

न्यासेन अनुपयोगीं कर्म अर्धं गृहून्न्ति राक्षसाः।।

इसके उपरान्त हाथ में जल लेकर :-

विनियोगः ॐ नमो भगवते रुद्रयेति दशाक्षर मंत्रस्य प्रजाप ऋषिः विराट छंदः श्रीरुद्रोदेवता न्यासे विनियोगः।।

जल छोड़ दें तथा अंगों का स्पर्श करें।

ॐ नमः मूर्धनी।

 ॐ नं नमः नासिकायम्।

 ॐ मोन नमः ललाते।

 ॐ भं नमः मुखे। 

ॐ गं नमः कण्ठे। 

ॐ वं नमः हृदये।।

 ॐ तेन नमः दक्षिण हस्ते। 

ॐ रुं नमः वामहस्ते। 

ॐ दां नमः नाभौ। 

ॐ यं नमः पादयोः।।


एवं न्यास विधानेन निष्पापोजायते नरः।

शरीर में भस्म वंदन रुद्राक्ष धारण करके अभिषेक करें

Shri Purneshwar Shiv Sewa Foundation:

 भगवान शंकर के पूजन में उनके प्रधान आठ तत्वों की शिवजी के समान ही पूजा करें। ये शिवगण कहलाते हैं। गणेश, पार्वती, कुमार, वीरभद्र, कुबेर, कीर्तिमुख, सर्प, नन्दीश्वर और नवें स्वयं ज्योति आदिदेव महादेव हैं। इन गणों का पूजन पृथक रूप से अथवा शिव के साथ-साथ भी हो सकता है। इनका पूजन सुपारी, तंदुलपुंज, प्रतिमा, पार्थिवलिङ्ग आदि में भी कर सकते हैं। इनके पूजन के बिना शिवपूजन अपूर्ण रहता है।

गणपति आवाहन

दधानं भृंगाली मनिश ममले गंडयुगले ।

 ददानं सर्वार्थांन निज चरण सेवा सुकृतिने । 

दयाधारं सारं निखिल निगमानामनुदीनम्।

 गजास्यं स्मेरास्यं तमिह कलये चित्तनिलये।

गणपति ध्यानम्

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

 निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

ॐ गं गणपतये नमः। गणपतिं आवाहयामि स्थापयामि पूजयामि भो गणपते! इहाग्च्छ इहतिष्ठ पूजां गृहाण मम सन्मुखो वरदोभव। गणपतये नमः।

पार्वती आवाहन

मुखे ते ताम्बूलं नयन युगले कज्जलकला।। 

ललाटे काश्मिरं विलासति गले मौक्तिक लता।। 

स्फुरत्कांचीशाटी पृथु कटि तटे हाटकमयी ।।

 भजामस्त्वां गौरी नागपति किशोरीमविरतम्।।

पार्वती ध्यानम्

हेमाद्रि तनया देवीं वरदाम् शंकर प्रियाम्। 

लम्बोदरस्य जननीं गौरीमावाहयाम्यहम्।।

ॐ पार्वत्यै नमः। पार्वतीं आवाहयामि स्थापयामि पूजयामि। 

भो पार्वति इहाग्च्छ इहतिष्ठ पूजां गृहाण मम सन्मुखी वरदाभव। पार्वत्यै नमः।


अथषड मुख आवाहन

शिखिवाहोदेवः समरभयकारी शिवसुतः।। 

परमसेनानी त्वं षड्मुख तथा द्वादशभुजः।। 

महाशक्तिः शोभा अमरगण सेवित सर्वदा।। 

व्रजामः त्वां शरणं प्रणतभयहारी ते यशः।।

 Shri Purneshwar Shiv Sewa Foundation: स्वामीकुमार ध्यानम्

शंकरस्तेज संभूतं कुमारं शिखिवाहनम्।

 षड्मुखं कृत्तिकासूनं गुहम् आवाहयाम्यहम्।। 

ॐ स्वामी कुमाराय नमः। स्वामी कुमारं आवाहयामि स्थापयामि पूज्यामि। भो कुमार ! इहाग्च्छ इहतिष्ठ पूजां गृहाण मम सन्मुखो वरदोभव। स्वामी कुमाराय नमः।

अथ वीरभद्र आवाहन

महावीरो भद्रः क्रतुफल प्रदाता वै पुराः। 

कृतः यज्ञः ध्वजाः कृतुपति सदेवः अधिगणा: ।। 

महाकोपाज्जातः शिवगण प्रधानो बलनिधिः। 

मखं रक्षो देव सकल समुदाये कुरु कृपा।।

वीरभद्र ध्यानम्

वीरभद्रो महातेजो शंकरस्य गणग्राणी।। इहाग्च्छ महावीर यज्ञरक्षां कुरुष्व में।।

ॐ वीरभद्राय नमः। वीरभद्रं आवाहयामि स्थापयामि पूजयामि। 

भो वीरभद्र ! इहाग्च्छ इहतिष्ठ पूजां गृहाण मम सन्मुखो वरदोभव। वीरभद्राय नमः।


अथ कुबेर आवाहन 


धनेशो यक्षेशो गिरीश प्रियदेवो निधिपतिः।। 

नरोवाहः देवः सित ध्वज पताका विजयते।। 

पुरी अलकाधीशो वृहत्तनुधारी कुरु दयाम्।। 

नरेंद्रानाम् नाथः कठिन दुःख दारिद्र्य दहनम्।।

कुबेर ध्यानम्

आवाहयामि देवेशं धनदं यक्ष पूजितम्।। 

दिव्यदेहं महाकायं नरयानगतिं विभुम्।।

ॐ कुबेराय नमः।

 कुबेरं आवाहयामि स्थापयामि पूज्यामि भो। कुबेर ! इहाग्च्छ इहतिष्ठ पूजां गृहाण मम सन्मुखो वरदोभव। कुबेराय नमः ।।

अथ कीर्ति मुख आवाहन

मुखे नैव कीर्तिः हुतवह सदेवा: नरवरः। 

त्वया दत्तं भोज्यं जगतफल दायी सुखकराः।।

 कृते पूजायागे भवयुतभवानी सर्वदा।

धनं धान्यं सौख्यं परम सायुज्यं देहि मे।।

कीर्तिमुख ध्यानम्

सर्वअङ्गमयमिशः विश्वरूपः कहाक्रतुः।। 

इहागच्छ महादेव पुजाम् मे सफली कुरु।।

Shri Purneshwar Shiv Sewa Foundation:

 ॐ कीर्तिमुखाय नमः। कीर्तिमुखं अवाहयामि स्थापयामि पूज्यामि। 

भो कीर्तिमुख ! इहाग्च्छ इहतिष्ठ पूजां गृहाण मम सन्मुखो वरदोभव।। कीर्तिमुखाय नमः।

सर्प आवाहन

अनन्तद्याज्ञः नागाः विपुलफण युताः मणियुताः।

महादेव कण्ठे बलयकृत शोभा युत सदाः।।

महायोगी रूपान् जगतभयकारी अभयदान् ।

नमामि तान देवान् विरल सरलान् तान विषधराम्।।

अथ सर्प ध्यानम्

अनन्ताद्यान् महाकायान् फणासप्तकमण्डितान्। आवाहायाम्यहं सर्पान्, नानामणि विभूषितान्।।

 Shri Purneshwar Shiv Sewa Foundation: 

ॐ सर्पेभ्यो नमः। 

सर्पान अवाहयामि स्थापयामि पूज्यामि। 

भो सर्प:! इहाग्च्छ इहतिष्ठ पूजां गृहाण मम सन्मुखो वरदोभव।। सर्वेभ्यो नमः।

नंदीश्वर आह्वान

सदानन्दी नन्दी जगतपति धारी सुरपतिः ।

महा धर्मो रूपः जनमन विहारी पशुपतिः।।

सदा श्रद्धा भक्तिः भव युत भवानी पाहिमाम्।

माखेऽस्मिन् सांगंन्त्वं महत्पुण्यं दीयताम्।।

नंदीश्वर ध्यानम्

नंदीश्वर महायोगी धर्मरूपः शिवप्रियः। 

इहागत्य महायज्ञे श्रद्धाभक्तिं प्रयच्छ मे।।

ॐ नंदीश्वराय नमः। नन्दीश्वरं आवाहयामि स्थापयामि पूजयामि। भो नन्दिन! इहाग्च्छ इहतिष्ठ पूजां गृहाण मम सन्मुखो वरदोभव।। नंदीश्वराय नमः।

शिव आवाहन

महोक्षः खट्वाङ्ग परशुरजिनं भस्मफणिनः। 

कपालं चेतीयत्तव वरद तन्त्रोपकरणम्।।

 सुरास्तां तां वृद्धिं विदधति भवद् भ्रूणप्रणिहितां। 

नहि स्वात्मारामं विषयमृगतृष्णा भ्रमयति।।

कैलाश पीठासन मध्य सस्थं भक्ताः सनन्दादिभिर्च्य मानम्।

भक्तार्तिदावानल प्रमेयं ध्यायेदुमालिङ्गित विश्वभूषणम् ।।

ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरि निभं चारुचंद्रा वसंतं।। रत्नकल्पोज्जवलाङ्ग परशुमृगवराभीति हस्तं प्रसन्नम ।। 

पद्मासीनं समन्तात्सुततममरगणै: व्याघ्रकृत्तिं वसानम्।। 

विश्वाद्यं विश्ववन्द्यं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।

 कैलाशशिखरस्थं पार्वतीपतिमुत्तमम्।। 

यथोक्तं रूपिणं शम्भु निर्गुणगुणरूपिणं।।

 पंचवक्त्रं दशभुजं त्रिनेत्रं वृषभध्वजम्।। 

कर्पूर गौरं दिव्याङ्ग चन्द्रमौलि कपर्दिनम्।। 

व्याघ्रचर्मोत्तरीयं च गजचर्माम्बरं शुभम्।। 

वासुक्यादि परीताङ्गं पिनाकाद्यायुधान्वितम्।। 

सिद्धयौऽष्टौ च यस्याग्रे नृत्यन्ति निरंतरम्।। जयजयेतिशब्दैच सेवितं भक्तपुन्जकैः।। 

तेजसा दुस्सहैरेव दुर्लंघ्यं देवसेवितम्।।

 शरण्यं सर्व सत्वानाम् प्रसन्नमुखपंकजम्।। 

वेदैः शास्त्रैर्यथागीतं विष्णुब्रह्मनुतं सदा।। 

भक्तवत्सलमानन्दं शिवं आवाहयाम्यहम्।।

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