भविष्य में पाने का मूल्य हैँ पुण्य.... प्रारब्ध निर्माण का कच्चा माल हैँ पुण्य... जरूरत की कमी, आवश्यकता, पाने की लालसा, तड़पना हैँ पाप।...
भविष्य में पाने का मूल्य हैँ पुण्य....
प्रारब्ध निर्माण का कच्चा माल हैँ पुण्य...
जरूरत की कमी, आवश्यकता, पाने की लालसा, तड़पना हैँ पाप।
जीवन जीने का सबसे आसान शरीर हैँ मानव देह ये आपके पूर्व संचित पुण्य का फल हैँ, जो कमियाँ हैँ वो पाप का फल हैँ... उन कमियों को पुण्य ही पूर्ण कर सकता हैँ किन्तु आप पाप करके पूरा करने में लगे हो तो ये आपकी भूल हैँ।
आप सड्कर्म करो पुरुषार्थ सिद्ध करो निश्चित निष्पॉप होकर ये शरीर छोड़ो तो अगला जीवन सम्पूर्ण सुखी मिलेगा जिसे स्वर्ग कहा जाता हैँ। पंडित पूरन जी महाराज



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